जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ

दोहा २२ (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु। लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु॥ २२ (क) ॥

अर्थ

[रावण ने कहा--] अरे जड़ जन्तु वानर! व्यर्थ बक-बक न कर; आरे मूर्ख! मेरी भुजाएँ तो देख। ये सब लोकपालों के विशाल बलरूपी चन्द्रमाको ग्रसने के लिये राहु हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा २२ (क) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद