जानहिं दिग्गज उर कठिनाई
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई
चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई॥ जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे॥ ३ ॥
अर्थ
दिग्गज (दिशाओं के हाथी) मेरी छाती की कठोरता को जानते हैं। जिनके भयानक दाँत, जब-जब जाकर मैं उनसे जबरदस्ती भिड़ा, मेरी छाती में कभी नहीं फूटे (अपना चिह्न भी नहीं बना सके), बल्कि मेरी छाती से लगते ही वे मूली की तरह टूट गये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद