इत उत झपटि दपटि कपि जोधा

चौपाई ३, दोहा ८२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा॥ चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना॥ ३ ॥

अर्थ

उसे बहुत ही क्रोध हुआ। वह इधर-उधर झपटकर और डपटकर वानर योद्धाओं को मसलने लगा। अनेकों वानर-भालू 'हे अंगद! हे हनुमानजी! रक्षा करो, रक्षा करो' [पुकारते हुए] भाग चले।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ