घायल बीर बिराजहिं कैसे

चौपाई १, दोहा ५४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे॥ लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा॥ १ ॥

अर्थ

घायल वीर कैसे शोभित हैं, जैसे फूले हुए पलास के पेड़। लक्ष्मण और मेघनाद दोनों योद्धा अत्यन्त क्रोध करके एक-दूसरे से भिड़ते हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मणजी का मूर्च्छित होना का वर्णन है।

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लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार