एक बान काटी सब माया
एक बान काटी सब माया
चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया॥ कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके॥ ४ ॥
अर्थ
तब श्रीरामजी ने एक ही बाण से सारी माया काट डाली, जैसे सूर्य अन्धकार के समूह को हर लेता है। तदनन्तर उन्होंने कृपादृष्टि से वानर-भालुओं की ओर देखा, [जिससे] वे ऐसे प्रबल हो गये कि रण में रोकने पर भी नहीं रुकते थे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।
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माल्यवान का रावण को समझाना