धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर
धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर
चौपाई १, दोहा ८२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर॥ गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा॥ १ ॥
अर्थ
रावण अत्यन्त क्रोधित होकर दौड़ा। वानर हुंकार करते हुए [लड़ने के लिए] उसके सामने चले। उन्होंने हाथों में वृक्ष, पत्थर और पहाड़ लेकर रावण पर एक ही साथ डाले।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।
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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ