भरत बाहुबल सील गुन प्रभु पद
भरत बाहुबल सील गुन प्रभु पद
दोहा ६० (ख) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
भरत बाहुबल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार। मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार॥ ६० (ख) ॥
अर्थ
भरतजी के बाहुबल, शील (सुन्दर स्वभाव), गुण और प्रभु के चरणों में अपार प्रीति की मन ही मन बार-बार सराहना करते हुए मारुति श्रीहनुमानजी चले जा रहे हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद” प्रकरण का दोहा ६० (ख) है। इस प्रकरण में औषधि लेकर लौटते हनुमान पर भरत के बाण का प्रहार और उनके बीच भावपूर्ण मिलन-संवाद का वर्णन है।
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भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद