अस कहि गई अपछरा जबहीं

चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं॥ कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहिं मंत्र तुम्ह देहू॥ २ ॥

अर्थ

ऐसा कहकर ज्यों ही वह अप्सरा गयी, त्यों ही हनुमानजी निशाचर के पास गये। हनुमानजी ने कहा--हे मुनि! पहले गुरुदक्षिणा ले लीजिये। पीछे आप मुझे मन्त्र दीजियेगा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान