अब जनि बतबढ़ाव खल करही
अब जनि बतबढ़ाव खल करही
चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही॥ दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ॥ १ ॥
अर्थ
अरे दुष्ट! अब बतबढ़ाव मत कर; मेरा वचन सुन और अभिमान त्याग दे! हे दशमुख! मैं दूत की तरह [सन्धि करने] नहीं आया हूँ। श्रीरघुवीर ने ऐसा विचारकर मुझे भेजा है--।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद