त्रेताँ ब्रह्म मनुज तनु धरिही
त्रेताँ ब्रह्म मनुज तनु धरिही
चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
त्रेताँ ब्रह्म मनुज तनु धरिही। तासु नारि निसिचर पति हरिही॥ तासु खोज पठइहि प्रभु दूता। तिन्हहि मिलें तैं होब पुनीता॥ ४ ॥
अर्थ
त्रेतायुग में साक्षात् परब्रह्म मनुष्य शरीर धारण करेंगे। उनकी स्त्री को राक्षसों का राजा हर ले जायगा। उसकी खोज में प्रभु दूत भेजेंगे। उनसे मिलने पर तू पवित्र हो जायगा।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार