जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी

चौपाई ४, दोहा १८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी। जिन्ह रघुबीर चरन रति मानी॥ लछिमन क्रोधवंत प्रभु जाना। धनुष चढ़ाइ गहे कर बाना॥ ४ ॥

अर्थ

ज्ञानी मुनि जिन्होंने श्रीरघुनाथजी के चरणों में प्रीति मान ली है, वे ही इस चरित्र (लीलारहस्य) को जानते हैं। लक्ष्मणजी ने जब प्रभु को क्रोधयुक्त जाना, तब उन्होंने धनुष चढ़ाकर बाण हाथ में ले लिये।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप