बिबिध जंतु संकुल महि भ्राजा
बिबिध जंतु संकुल महि भ्राजा
चौपाई ६, दोहा १५ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
बिबिध जंतु संकुल महि भ्राजा। प्रजा बाढ़ जिमि पाइ सुराजा॥ जहँ तहँ रहे पथिक थकि नाना। जिमि इंद्रिय गन उपजें ग्याना॥ ६ ॥
अर्थ
पृथ्वी अनेक तरह के जीवों से भरी हुई उसी तरह शोभायमान है, जैसे सुराज्य पाकर प्रजा की वृद्धि होती है। जहाँ-तहाँ अनेक पथिक थककर ठहरे हुए हैं, जैसे ज्ञान उत्पन्न होने पर इन्द्रियाँ [शिथिल होकर विषयों की ओर जाना छोड़ देती हैं]।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “वर्षा ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा ऋतु में मेघ, पर्वत, वन और प्रकृति के सौंदर्य तथा विरह-भावों का वर्णन है।
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वर्षा ऋतु वर्णन