बरषा बिगत सरद रितु आई
बरषा बिगत सरद रितु आई
चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥ फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई॥ १ ॥
अर्थ
हे लक्ष्मण! देखो, वर्षा बीत गयी और परम सुन्दर शरद ऋतु आ गयी। फूले हुए कास से सारी पृथ्वी छा गयी। मानो वर्षा ऋतु ने [कासरूपी सफेद बालों के रूप में] अपना बुढ़ापा प्रकट किया है।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “शरद ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शरद ऋतु की निर्मल आकाश, स्वच्छ जल और शांत प्रकृति की सुंदर छटा का वर्णन है।
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शरद ऋतु वर्णन