बालि त्रास ब्याकुल दिन राती
बालि त्रास ब्याकुल दिन राती
चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
बालि त्रास ब्याकुल दिन राती। तन बहु ब्रन चिंताँ जर छाती॥ सोइ सुग्रीव कीन्ह कपिराऊ। अति कृपाल रघुबीर सुभाऊ॥ २ ॥
अर्थ
जो सुग्रीव दिन-रात बालि के भय से व्याकुल रहता था, जिसके शरीर में बहुत-से घाव हो गये थे और जिसकी छाती चिन्ता के मारे जला करती थी, उसी सुग्रीव को उन्होंने वानरों का राजा बना दिया। श्रीरामचन्द्रजी का स्वभाव अत्यन्त ही कृपालु है।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तारा के विलाप पर श्रीराम के उपदेश, सुग्रीव का राज्याभिषेक और अंगद को युवराज पद का वर्णन है।
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तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक