अनुज क्रिया करि सागर तीरा
अनुज क्रिया करि सागर तीरा
चौपाई १, दोहा २८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
अनुज क्रिया करि सागर तीरा। कहि निज कथा सुनहु कपि बीरा॥ हम द्वौ बंधु प्रथम तरुनाई। गगन गए रबि निकट उड़ाई॥ १ ॥
अर्थ
समुद्र के तीर पर छोटे भाई जटायु की क्रिया (श्राद्ध आदि) करके सम्पाती अपनी कथा कहने लगा-हे वीर वानरो! सुनो, हम दोनों भाई उठती जवानी में एक बार आकाश में उड़कर सूर्य के निकट चले गये।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार