उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप

दोहा १७६ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप। तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप॥ १७६ ॥

अर्थ

यद्यपि वे पुलस्त्य ऋषि के पवित्र, निर्मल और अनुपम कुल में उत्पन्न हुए, तथापि ब्राह्मणों के शाप के कारण वे सब पापरूप हुए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १७६ है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार