तुम्ह पुनि राम राम दिन राती

चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती॥ रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई॥ ४ ॥

अर्थ

और हे कामदेव के शत्रु। आप भी दिन-रात आदरपूर्वक राम-राम जपा करते हैं। ये राम वही अयोध्या के राजाके पुत्र हैं? या अजन्मा, निर्गुण और अगोचर कोई और राम हैं?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शिव-पार्वती संवाद