तेहि कें बचन मानि बिस्वासा

चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा॥ निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली॥ ३ ॥

अर्थ

उनके वचनों पर विश्वास मानकर तुम ऐसा पति चाहती हो जो स्वभाव से ही उदासीन, निर्गुण, निर्लज्ज, बुरे वेष वाला, नर-कपालों की माला पहनने वाला, अकुल, बिना घर-बार का, नंगा और शरीर पर साँपों को लपेटे रखने वाला है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।

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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती