तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी
तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी
चौपाई ४, दोहा ५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी। छूटउ बेगि देह यह मोरी॥ जौं मोरें सिव चरन सनेहू। मन क्रम बचन सत्य ब्रतु एहू॥ ४ ॥
अर्थ
तो मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ कि मेरी यह देह जल्दी छूट जाय। यदि मेरा शिवजी के चरणों में प्रेम है और मेरा यह [प्रेम का] व्रत मन, वचन और कर्म से सत्य है,
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
शिवजी द्वारा सती का त्याग