तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना
तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना
चौपाई १, दोहा १२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना। कौतुकनिधि कृपाल भगवाना॥ तहाँ जलंधर रावन भयऊ। रन हति राम परम पद दयऊ॥ १ ॥
अर्थ
लीलाओं के भण्डार कृपालु हरि ने उस स्त्री के शाप को प्रामाण्य दिया (स्वीकार किया)। वही जलन्धर उस कल्प में रावण हुआ, जिसे श्रीरामचन्द्रजी ने युद्ध में मारकर परम पद दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु