तदपि कही गुर बारहिं बारा

चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा॥ भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई॥ १ ॥

अर्थ

तो भी गुरुजी ने जब बार-बार कथा कही, तब बुद्धि के अनुसार कुछ समझ में आयी। वही अब मेरे द्वारा भाषा में रची जायगी, जिससे मेरे मन को प्रबोध हो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।

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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा