स्यामसुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं
स्यामसुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं
दोहा १० (ख) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
स्यामसुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं सब पान। गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहिं सुजान॥ १० (ख) ॥
अर्थ
श्यामा गौ काली होने पर भी उसका दूध उज्ज्वल और बहुत गुणकारी होता है। यही समझकर सब लोग उसे पीते हैं। इसी तरह गँवारू भाषा में होने पर भी श्रीसीता-रामजी के यश को बुद्धिमान् लोग बड़े चाव से गाते और सुनते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का दोहा १० (ख) है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।
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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता