स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी

चौपाई ३, दोहा १९८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी॥ चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा॥ ३ ॥

अर्थ

श्याम और गौर शरीरवाली दोनों सुन्दर जोड़ियों की शोभा को देखकर माताएँ तृण तोड़ती हैं [जिसमें दीठ न लग जाय]। यों तो चारों ही पुत्र शील, रूप और गुण के धाम हैं, तो भी सुख के समुद्र श्रीरामचन्द्रजी सबसे अधिक हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला