सुनु सिय सत्य असीस हमारी
सुनु सिय सत्य असीस हमारी
चौपाई ४, दोहा २३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥ ४ ॥
अर्थ
हे सीता! हमारी सच्ची आसीस सुनो, तुम्हारी मनःकामना पूरी होगी। नारदजी का वचन सदा पवित्र (संशय, भ्रम आदि दोषों से रहित) और सत्य है। जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही वर तुमको मिलेगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद