सुनि राजा अति अप्रिय बानी

चौपाई १, दोहा २०८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी॥ चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी॥ १ ॥

अर्थ

इस अत्यन्त अप्रिय वाणी को सुनकर राजा का हृदय काँप उठा और उनके मुख की कान्ति फीकी पड़ गयी। [उन्होंने कहा—] हे ब्राह्मण! मैंने चौथेपन में चार पुत्र पाये हैं, आपने विचार कर बात नहीं कही।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।

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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना