सेवकु सो जो करै सेवकाई
सेवकु सो जो करै सेवकाई
चौपाई २, दोहा २७१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई॥ सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥ २ ॥
अर्थ
सेवक वह है जो सेवाका काम करे। शत्रु का काम करके तो लड़ाई ही करनी चाहिये। हे राम! सुनो, जिसने शिवजी के धनुष को तोड़ा है, वह सहसबाहु के समान मेरा शत्रु है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद