संभुचाप बड़ बोहितु पाई
संभुचाप बड़ बोहितु पाई
चौपाई ४, दोहा २६० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
संभुचाप बड़ बोहितु पाई। चढ़े जाइ सब संगु बनाई॥ राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहिं कोउ कड़हारू॥ ४ ॥
अर्थ
ये सब शिवजी के धनुषरूपी बड़े जहाज को पाकर, समाज बनाकर उस पर जा चढ़े। ये श्रीरामचन्द्रजी की भुजाओं के बलरूपी अपार समुद्र के पार जाना चाहते हैं, परंतु कोई कड़हारू नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।
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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध