संभु सहज समरथ भगवाना

चौपाई २, दोहा ७० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना॥ दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू॥ २ ॥

अर्थ

शिवजी सहज ही समर्थ हैं, क्योंकि वे भगवान् हैं। इसलिए इस विवाह में सब प्रकार कल्याण है। परन्तु महेशजी की आराधना बड़ी कठिन है, फिर भी कष्ट करने से वे बहुत जल्द सन्तुष्ट हो जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या