सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें
चौपाई १, दोहा ३०२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें॥ करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ॥ १ ॥
अर्थ
वसिष्ठजी के साथ [जाते हुए] राजा दशरथजी कैसे शोभित हो रहे हैं, जैसे देवगुरु बृहस्पतिजी के साथ इन्द्र हों। वेद की विधि से और कुल की रीति के अनुसार सब कार्य करके तथा सबको सब प्रकार से सजा हुआ देखकर,
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान