रन मद मत्त फिरइ जग धावा
रन मद मत्त फिरइ जग धावा
चौपाई ५, दोहा १८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खोजत कतहुँ न पावा॥ रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी॥ ५ ॥
अर्थ
रण के मद में मतवाला होकर वह जगत् भर में दौड़ता फिरा, प्रतिभट खोजता, पर कहीं नहीं पाया। सूर्य, चन्द्रमा, पवन, वरुण, धनधारी, अग्नि, काल, यम आदि सब अधिकारी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार