रामचरित चिंतामनि चारू
रामचरित चिंतामनि चारू
चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामचरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू॥ जग मंगल गुनग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी का चरित्र सुन्दर चिन्तामणि है और संतों की सुबुद्धिरूपी स्त्री का सुन्दर श्रृंगार है। श्रीरामचन्द्रजी के गुणसमूह जगत् का कल्याण करनेवाले और मुक्ति, धन, धर्म और परमधाम के देनेवाले हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा