रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु
रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु
दोहा ३२१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु चकोर। करत पान सादर सकल प्रेमु प्रमोदु न थोर॥ ३२१ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के मुखरूपी चन्द्रमा की छबि को सभी के सुन्दर नेत्ररूपी चकोर आदरपूर्वक पान कर रहे हैं; प्रेम और प्रमोद कम नहीं है (अर्थात् बहुत है)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३२१ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत