रचे रुचिर बर बंदनिवारे

चौपाई १, दोहा २८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रचे रुचिर बर बंदनिवारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे॥ मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए॥ १ ॥

अर्थ

ऐसे सुन्दर और उत्तम बंदनवार बनाये मानो कामदेव ने फंदे सजाये हों। अनेकों मंगल-कलश और सुन्दर ध्वजा, पताका, पट और चँवर बनाये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान