फिरत बिपिन आश्रम एक देखा

चौपाई १, दोहा १५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा॥ जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई॥ १ ॥

अर्थ

वन में फिरते-फिरते उसने एक आश्रम देखा; वहाँ कपट से मुनि का वेष बनाये एक राजा रहता था, जिसका देश राजा प्रतापभानु ने छीन लिया था और जो सेना को छोड़कर युद्ध से भाग गया था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा