परम सती असुराधिप नारी
परम सती असुराधिप नारी
चौपाई ४, दोहा १२३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
परम सती असुराधिप नारी। तेहिं बल ताहि न जितहिं पुरारी॥ ४ ॥
अर्थ
उस दैत्यराज की स्त्री परम सती (बड़ी ही पतिक्रता) थी। उसी के प्रताप से त्रिपुरासुर [जैसे अजेय शत्रु] का विनाश करने वाले शिवजी भी उस दैत्य को नहीं जीत सके।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु