पंच सबद धुनि मंगल गाना
पंच सबद धुनि मंगल गाना
चौपाई २, दोहा ३१९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना॥ करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा॥ २ ॥
अर्थ
पञ्चशब्दों की ध्वनि और मंगलगान हो रहे हैं। नाना प्रकार के पट-पाँवड़े बिछ रहे हैं। आरती करके और अर्घ्य देकर उन्होंने श्रीरामजी को मण्डप में पहुँचाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत