नृप करि बिनय महाजन फेरे
नृप करि बिनय महाजन फेरे
चौपाई १, दोहा ३४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे॥ भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे॥ १ ॥
अर्थ
राजा दशरथजी ने विनती करके प्रतिष्ठित जनों को लौटाया और आदर के साथ सब माँगनेवालों को बुलवाया। उनको गहने-कपड़े, घोड़े-हाथी दिये और प्रेम से पुष्ट करके सबको सम्पन्न कर दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना