नाऊ बारी भाट नट राम निछावरि

दोहा ३१९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

नाऊ बारी भाट नट राम निछावरि पाइ। मुदित असीसहिं नाइ सिर हरषु न हृदयँ समाइ॥ ३१९ ॥

अर्थ

नाई, बारी, भाट और नट श्रीरामचन्द्रजी की निछावर पाकर आनन्दित हो सिर नवाकर आशीष देते हैं; उनके हृदय में हर्ष समाता नहीं है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३१९ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत