नभ अरु नगर कोलाहल होई

चौपाई ४, दोहा ३१९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई॥ एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए॥ ४ ॥

अर्थ

आकाश और नगर में कोलाहल हो रहा है। अपनी-परायी कोई कुछ भी नहीं सुनता। इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजी मण्डप में आये और अर्घ्य देकर आसन पर बैठाये गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत