मुकुत न भए हते भगवाना
मुकुत न भए हते भगवाना
चौपाई १, दोहा १२३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना॥ एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी॥ १ ॥
अर्थ
भगवान् के द्वारा मारे जाने पर भी वे मुक्त नहीं हुए, क्योंकि ब्राह्मण के वचन (शाप) का प्रमाण तीन जन्मों के लिए था। अतः एक बार उनके कल्याण के लिये भक्तानुरागी भगवान् ने फिर अवतार लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु