मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े
चौपाई ४, दोहा २७६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े॥ अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे॥ ४ ॥
अर्थ
आपको कभी रणधीर बलवान वीर नहीं मिले। हे ब्राह्मण देवता! आप घर ही में बड़े हैं। यह सुनकर "अनुचित है, अनुचित है" कहकर सब लोग पुकार उठे। तब श्रीरघुनाथजी ने इशारे से लक्ष्मणजी को रोक दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद