मन पछिताति सीय महतारी

चौपाई ४, दोहा २७० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी॥ भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता॥ ४ ॥

अर्थ

सीताजी की माता मन में पछता रही हैं कि हाय! विधि ने अब सँवरी बात बिगाड़ दी। परशुरामजी का स्वभाव सुनकर सीताजी को आधा निमेष भी कल्प के समान बीतने लगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना