मागत बिदा राउ अनुरागे
मागत बिदा राउ अनुरागे
चौपाई ३, दोहा ३६० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे॥ नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी॥ ३ ॥
अर्थ
अन्त में जब विश्वामित्रजी ने विदा माँगी, तब राजा प्रेममग्न हो गये और पुत्रों सहित आगे खड़े हो गये। [वे बोले—] हे नाथ! यह सारी सम्पदा आपकी है। मैं तो स्त्री-पुत्रों सहित आपका सेवक हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना