कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु
कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु
चौपाई १, दोहा २७४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिलकालबस निज कुल घालकु॥ भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू॥ १ ॥
अर्थ
हे विश्वामित्र! सुनो, यह बालक बड़ा कुबुद्धि और कुटिल है, काल के वश होकर यह अपने कुल का घातक बन रहा है। यह सूर्यवंशरूपी पूर्णचन्द्र का कलंकू है। यह बिलकुल उद्दण्ड, मूर्ख और निडर है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद