करि बिनती पद गहि दससीसा
करि बिनती पद गहि दससीसा
चौपाई २, दोहा १७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करि बिनती पद गहि दससीसा। बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा॥ हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें॥ २ ॥
अर्थ
रावण ने विनय करके और चरण पकड़कर कहा-हे जगदीश्वर। सुनिये, वानर और मनुष्य-- इन दो जातियों को छोड़कर हम और किसी के मारे न मरें [यह वर दीजिये]।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार