काम कोटि छबि स्याम सरीरा
काम कोटि छबि स्याम सरीरा
चौपाई १, दोहा १९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा॥ अरुन चरन पंकज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती॥ १ ॥
अर्थ
उनके नील कमल और गम्भीर (जल से भरे हुए) मेघ के समान श्याम शरीर में करोड़ों कामदेवों की शोभा है। लाल-लाल चरणकमलों के नखों की [शुभ्र] ज्योति ऐसी मालूम होती है जैसे [लाल] कमल के पत्तों पर मोती स्थिर हो गए हों।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला