कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई
कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई
चौपाई ३, दोहा २२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई। बैठहिं नगर लोग जहँ जाई॥ तिन्ह के निकट बिसाल सुहाए। धवल धाम बहुबरन बनाए॥ ३ ॥
अर्थ
वह कुछ ऊँचा था और सब प्रकार से सुन्दर था, जहाँ जाकर नगर के लोग बैठेंगे। उन्हीं के निकट विशाल एवं सुन्दर सफेद मकान अनेक रंगों के बनाये गये हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण