कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु
कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु
दोहा १४ (ग) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल। बालबिनय सुनि सुरुचि लखि मो पर होहु कृपाल॥ १४ (ग) ॥
अर्थ
कवि और पण्डितगण। आप जो रामचरित्ररूपी मानसरोवर के सुन्दर हंस हैं, मुझ बालक की विनती सुनकर और सुन्दर रुचि देखकर मुझपर कृपा करें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कवि वन्दना” प्रकरण का दोहा १४ (ग) है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा पूर्ववर्ती महाकवियों की वंदना और विनम्र भाव से रघुपति-कथा रचने के संकल्प का वर्णन है।
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कवि वन्दना