जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा
चौपाई २, दोहा १४१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा॥ जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी॥ २ ॥
अर्थ
जिन प्रभु श्रीरामचन्द्रजी को तुमने भाई लक्ष्मणजी के साथ मुनियों का-सा वेष धारण किये वन में फिरते देखा था और हे भवानी! जिनके चरित्र देखकर सती के शरीर में तुम बावली हो गयी थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग