जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा
जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा
चौपाई ३, दोहा २०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा॥ बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई॥ ३ ॥
अर्थ
जिस प्रकार नगर के लोग सुखी हों, कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजी वही संयोग (लीला) करते हैं। वे मन लगाकर वेद-पुराण सुनते हैं और फिर स्वयं छोटे भाइयों को समझाकर कहते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला